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Rajasthan Exam

राजस्थान की प्रमुख ऐतिहासिक घटनाएँ 566 ई. पू. मेवाड़ में गुहिल द्वारा राज्य स्थापित। 622 ई.पू. हिजरी सन का प्रारम्भ हुआ। 628 ई. पू. भीनमाल के ब्रह्मदत ने "ब्रह्ममस्फुट सिद्धान्त" की रचना की। 728 ई. में बप्पा रावल ने मौर्य राजा से चित्तौड़ राज्य छिना। 943 ई. में सांभर के लक्ष्मण चौहान ने नाडोल पर हमलाकर स्वतंत्र राज्य स्थापित किया। 947 ई. रामसिंह ने टोंकरा (वर्तमान टोंक बसाया)। 1024 ई. में महमूद गजनवी ने अजमेर पर आक्रमण किया और गढबीठली का घेरा डाला लेकिन घायल हो जाने पर वह घेरा उठाकर अन्हिलवाडा चला गया। 1026 ई. में महमूद गजनवी ने वाराह (जैसलमेर) पर हमला किया। 1040 ई. यादव विजयपाल ने मथुरा से अपनी राजधानी हटाकर विजय मंदिरगढ़ में स्थापित की। यह गढ़ अब बयाना गढ़ के नाम से प्रसिद्ध है। 1137 ई. में दुल्हराय ने बड़गुजरों को हटाकर दौसा पर कब्जा किया और ढूँढाढ़ राज्य की स्थापना की। 1112 ई. में मुहम्मद बारलीम ने नागौर पर कब्जा किया व 1119 ई. में इसी ने नागौर का किला बनवाया। इसका पुनः निर्माण केमास ने कराया। 1135 ई. में अर्णोराज ने मुसलमान आक्रमणकारियों को हटाकर युद्ध स्थल पर आनासागर (अजमेर) झील का निर्माण करवाया। 1150 ई. में अर्णोराज की हत्या इसके पुत्र जगदेव ने कर दी। 1151 ई. में अजमेर के विग्रहराज चतुर्थ ने चित्तौड़ पर कब्जा कर मेवाड़ का कुछ हिस्सा अपने राज्य में मिलाया। 1152 ई. में विग्रहराज चतुर्थ (बीसलदेव) ने अपने पितृहन्ता भाई जगदेव को हटाकर अजमेर की राजगद्दी प्राप्त की। 1153 ई. में बीसलदेव (विग्रहराज चतुर्थ) दिल्ली को जीतकर प्रथम चौहान सम्राट बना। 1155 ई. में राव जैसल ने जैसलमेर बसाया। 1158 ई. में यादव तवनपाल ने त्वनगढ़ त्रिभुवनगढ़ बनवाया। 1164 ई. में विग्रहराज चौहान ने शिवलिंग स्तम्भनामक शिलालेख दिल्ली में खुदवाया। 1166 ई. में पृथ्वीराज चौहान तृतीय का जन्म हुआ। 1177 ई. में पृथ्वीराज चौहान तृतीय का राज्यारोहण हुआ। 1182 ई. में पृथ्वीराज चौहान तृतीय दिग्विजय के लिए निकला उसने भंडानकों से मेवात जीता। 1187 ई. में इसने गुजरात पर आक्रमण किया और आबू के परमार शासक धारावर्ष को हराया। 1190 ई. में जयानक ने "पृथ्वीराज विजय" की रचना की। 1191 ई. में पृथ्वीराज ने थानेश्वर के निकट तरावड़ी के मैदान में मुहम्मद गौरी को प्रथम बार हराया। 1195 ई. में ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती अजमेर आए। इनकी मृत्यु 16 मार्च, 1236 ई. को अजमेर में हुई। 1230 ई. में तेजपाल ने नेमिनाथ (लुणवशाही) मंदिर का निर्माण आबू पहाड़ पर करवाया। 1246 ई. में बारड़देव परमार ने बारड़मेर (वर्तमान बाड़मेर) बसाया। 1248 ई. में अलगु खां (ग्यासुद्दीन बलबन) ने रणथम्भौर, बूंदी व चित्तौड़ पर हमला कर लूटा। 1354 ई. में राव बरसिंह ने तारागढ़ (बूंदी) का दुर्ग बनवाया। 1570 ई. में अकबर ने नागौर दरबार आयोजित किया। 1571 ई. में बादशाह अकबर ने अजमेर शहर की चहार दीवारी बनवाई, उसने अपने निवास के लिए एक महल भी बनवाया जो अब तोपखाना कहलाता है। 1585 ई. में आमेर के भगवानदास की पुत्री मानीबाई का शहजादा सलीम के साथ लाहौर में विवाह हुआ। 1586 ई. में जोधपुर के राजा उदयसिंह की पुत्री मानमती (जगत गुसाई) का शहजादा सलीम से विवाह हुआ यह बेगम बाद में जोधाबाई कहलाई। 1621 ई. में बादशाह जहांगीर ने गजसिंह को "दलथम्भन" (फौज को रोकने वाला) की पदवी दी। 1637 ई. में शाहजहां ने अजमेर की आनासागर झील पर बाहर दरियाँ बनवाई। 1639 ई. में शाहजहां ने आमेर नरेश जयसिंह को "मिर्जाराजा" की पदवी दी। 1644 ई. में बीकानेर व नागौर के शासकों की सेना के बीच मतीरे की राड़ (लड़ाई) हुई। 14 मार्च, 1659 ई. को दौराई (अजमेर) का युद्ध औरंगजेब व दारा के मध्य हुआ जिसमें दारा की पराजय हुई। 1660 ई. में महाराणा राजसिंह ने किशनगढ़ की राजकुमारी चारूमती जिसके साथ बादशाह औरंगजेब विवाह करना चाहता था, के साथ विवाह किया। 1662 ई. में राजसमंद झील का निर्माण कार्य आरम्भहुआ। 1670 ई. में पूर्ण हुआ, 1676 ई. में नामकरण किया। 1667 ई. में आमेर के मिर्जाराजा जयसिंह की बुरहानपुर में मृत्यु हुई। 1673 ई. में चौपासनी (जोधपुर) से श्रीनाथ जी की प्रतिमा सिहाड़ (वर्तमान नाथद्वारा) ले जाकर स्थापित की गयी। 1679 ई. में जोधपुर के महाराजा अजीतसिंह का लाहौर में जन्म हुआ। 1706 ई. में बूंदी के जोधसिंह हाड़ा गणगौर की प्रतिमा सहित तालाब में डूब मरा। तब से प्रसिद्ध है-"हाड़ौ ले डूब्यों गणगौर"। 1714 ई. में अजीतसिंह की पुत्री इन्द्रकुंवर का बादशाह फर्रुखसियर से विवाह हुआ। विवाह हिन्दु-मुस्लिम दोनों तरीके से सम्पन्न हुआ। 10 सितम्बर, 1730 ई. में जोधपुर के पास खेजड़ली गांव में हरे वृक्षों को बचाने के लिए 363 स्त्री-पुरुषों का बलिदान हुआ। 1735 ई. में जयपुर के गोविन्द देवजी मंदिर का निर्माण, गोविंददेवजी की मूर्ति 1714 ई. में वृन्दावन बाग में रखी और वहां से जयपुर में इस वर्ष मंदिर निर्माण के पश्चात् स्थापित की गयी। 1741 ई. में मगवाणा का युद्ध 21 जून, 1741 ई. जोधपुर नरेश अभयसिंह व उसके भाई बख्त सिंह द्वारा जयपुर नरेश जयसिंह के साथ मगवाणा के मैदान में युद्ध हुआ, जिसमें जोधपुर की सेना ने जयपुर की सेना को काफी नुकसान पहुंचाया। 3 मार्च, 1748 ई. जयपुर नरेश ईश्वरीसिंह व अहमदशाह अब्दाली के बीच मानपुर में युद्ध हुआ, अब्दाली हारा। 1805 ई. में जोधपुर नरेश मानसिह ने जोधपुर के किले में हस्तलिखित पुस्तकों का एक पुस्तकालय "पुस्तक प्रकाश" स्थापित किया, जोधपुर के महामंदिर की प्रतिष्ठा हुई। 1807 ई. में 13 मार्च, 1807 ई. जयपुर व जोधपुर की सेना के बीच पर्वतसर की घाटी में गींगोली का युद्ध हुआ। जिसमें जोधपुर की सेना हारी। 1810 ई. में 21 जुलाई, 1810 ई. उदयपुर के महाराणा भीमसिंह ने अमीर खां के प्रस्ताव के अनुसार राजकुमारी कृष्णा कुमारी को जहर पिलाकर मार डाला। 1818 ई. में 8 मार्च, 1818 ई. कर्नल टॉड मेवाड़ और हाडौती का पॉलीटिकल ऐजेन्ट नियुक्त होकर उदयपुर पहुंचा। 1818 ई. में 20 नवम्बर, 1818 ई. नसीराबाद में अंग्रेजी सेना की छावनी स्थापित हुई। 1822 ई. में मेरवाड़ा बटालियन की स्थापना की गई, जिसमें मेर व मीणा ही भर्ती किये गये। 1824 ई. में 19 नवम्बर, 1824 गलियाकोट (डूंगरपुर) की पीर फखरूद्दीन की कब्र पर मेला भरने लगा। 1828 ई. में कवि शिरोमणी जोधराज ने नीमराणा में "हम्मीर रासो" नामक ग्रन्थ की रचना की। इस काव्य ग्रन्थ को बाद में काशी की"नागरी प्रचारिणी सभा" ने छापा। 4 दिसम्बर, 1828 ई. गवर्नर जनरल लार्ड बैंटिंग ने सती प्रथा बंद की। 5 अप्रैल, 1834 ई. में जैसलमेर व बीकानेर की सेनाओं के बीच बासणणी की लड़ाई हुई। राजस्थान के दो राज्यों के बीच यह अन्तिम लड़ाई थी। 1837 ई. में अंग्रेजों ने एरिनपुरा छावनी (सिरोही राज्य) में जोधपुर लीजियन स्थापित की। बीकानेर नरेश रतनसिंह ने गया में राजपूतों से अपनी पुत्रियों को न मारने की प्रतिज्ञा करवाई। 1841 ई. में मेवाड़ भीलकोर की स्थापना हुई। 1844 ई. में जयपुर में महाराजा कॉलेज स्थापित किया गया। 1845 ई. में AGG का कार्यालय अजमेर से आबू लाया गया। 22 अक्टूबर, 1853 ई. उदयपुर में डाकन प्रथा को गैर कानूनी घोषित किया गया। 14 जनवरी, 1856 ई. को जयपुर में रामनिवास बाग की नींव रखी गयी। 1860 ई. में ब्यावर नगर में ईसाई धर्मप्रचार हेतु मिशन केन्द्र स्थापित किए गए। 1864 ई. में ब्यावर में लीथो प्रेस खोली गयी। 1866 ई. में अगस्त, 1866 जोधपुर से "मारवाड़ गजट" प्रकाशित होने लगा। 12 जून, 1874 ई. में स्वामी दयानंद ने "सत्यार्थ प्रकाश" ग्रन्थ की रचना की। 21 अक्टूबर, 1875 ई. में अजमेर में मेया कॉलेज की स्थापना की गई। 1882 ई. में स्वामी दयानंद सरस्वती ने उदयपुर में सुप्रसिद्ध ग्रन्थ "सत्यार्थ प्रकाश" का प्रकाशन करवाया। 20 जनवरी, 1888 ई. में जोधपुर में मारवाड़ राज्य का इतिहास तैयार करने के लिए इतिहास विभाग की स्थापना की गयी। 1888 ई. में राजपूताने की कर्नल वाल्टर की अध्यक्षता में वाल्टर राजपूत हितकारिणी सभा अजमेर में स्थापित की गई। 1891 ई. में ब्यावर नगर में कृष्णा कॉटन मिल की स्थापना हुई। 1892 ई. में अलवर में "राजवाड़ा" ग्लास कंपनी की स्थापना हुई। 8 अगस्त, 1895 अजमेर में पहला साप्ताहिक "राजपूताना टाइम्स" चालू किया गया। 1897 ई. में बिजौलिया का प्रथम किसान आंदोलन आरम्भ जिसे 1904 ई. में सफलता मिली। 1899 ई. में जोधपुर नरेश सरदारसिंह ने "जसवंत जसोभूषण" नामक ग्रन्थ रचने के उपलक्ष्य में कविराज मुरारीदान को 5000 रूपये की रेख के 4 गांव दिये। 1900 ई. में सर प्रतापसिंह जोधपुर रिसाला लेकर चीन युद्ध के लिए रवाना हुए। 1 नवम्बर, 1900 ई. में जोधपुर राज्य की टकसाल बंद की गई, जोधपुर राज्य की टकसालों में विजयशाही रूपया बनना बंद हो गया और अंग्रेजी कलदार रूपया चलने लगा। 1 जनवरी, 1903 ई. को दिल्ली दरबार में राजस्थान के कई नरेश शामिल हुए। 1913 ई. में 8 नवम्बर, 1913 मानगढ़ हत्याकांड। 1920 ई. में जोधपुर में मारवाड़ सेवा संघ का भंवरलाल सर्राफ की अध्यक्षता में गठन हुआ। राजस्थान सेवा संघ की स्थापना सन् 1919 वर्धा (महाराष्ट्र) में हुई। 1924 ई. में 15 जून, 1924" मरूधर मित्र" हितकारिणी सभा का नाम बदलकर "मारवाड़ हितकारिणी सभा" रखा गया। 1927 ई. में 26 अक्टूबर, 1927 गंगनहर का उद्घाटन वायसराय लार्ड इरविन द्वारा किया गया। 1929 ई. में 12 मई, 1929 ई. हीरालाल शास्त्री के प्रयास से वनस्थली में जीवन कुटीर नामक संस्था स्थापित हुई। 1948 ई. में 18 मार्च, 1948 ई. भरतपुर नगर में अलवर, भरतपुर, धौलपुर, करौली राज्यों का संघ "मत्स्य संघ" के नाम से बना जिसका राजप्रमुख धौलपुर नरेश को बनाया गया, राजधानी अलवर को बनाया गया। 1949 ई. में 18 दिसम्बर, 1949 ई. वेंकटचारी समिति ने जागीरदारी समस्या पर अपनी रिर्पोट पेश की। 22 दिसम्बर, 1949 ई. "राजस्थान लोकसेवा आयोग" कानून लागू किया गया। 1950 ई. में 26 जनवरी, 1950 ई. अजमेर भारत में विलीन हुआ तथा सिरोही राज्य को आबूरोड़ व देलवाड़ा तहसील को छोड़कर, जो बम्बई राज्य में मिलाई गई, राजस्थान में मिलाया गया। 1952 ई. में 29 मार्च, 1952 ई. में 160 सदस्यों की राजस्थान विधानसभा का उद्घाटन हुआ। 1 अप्रैल, 1955 ई." राजस्थान आकाशवाणी जयपुर ने प्रसारण कार्य आरम्भ किया। 15 अक्टूबर, 1955 ई. "राजस्थान काश्तकारी कानून" लागू हुआ। 1956 ई. में 1 नवम्बर, 1956 अजमेर, आबू तथा सुनेलटप्पा राज. में मिलाए गए तथा सिरोज (एम.पी.) में मिलाया। वर्तमान राजस्थान का नवनिर्माण, राजप्रमुख का पद समाप्त किया गया। नवनिर्मित राजस्थान का मुख्यमंत्री मोहनलाल सुखाड़िया को चुना गया। 1958 ई. में 28 जनवरी, 1958 "राजस्थान साहित्य अकादमी" उदयपुर। राजस्थान संगीत नाटक अकादमी, जोधपुर। राजस्थान ललित कला अकादमी, जयपुर। 1960 ई. में 10 फरवरी, 1960 राजस्थान में मृत्युभोज रोकने पर अधिनियम लागू किया गया। 20 नम्बबर, 1960 ई. जवाहरलाल नेहरू ने कोटा बांध का उद्घाटन किया। 1961 ई. में 17 जुलाई, 1961 राजस्थान प्राचीन स्मारक व पुरातत्व स्थान तथा प्राचीन वस्तु अधिनियम लागू किया गया। 30 नवम्बर, 1961 ई. राजस्थान सागड़ी प्रथा उन्मूलन लागू किया गया। 1962 ई. में 6 जून, 1962 उदयपुर में "कृषि विश्वविद्यालय" की स्थापना की गई। 1965 ई. 26 जनवरी, 1965 हिन्दी "भारतीय संघ" की सरकारी भाषा बन गई। 1968 ई. में 15 जुलाई, 1968 "राजस्थान हिन्दी ग्रन्थ अकादमी" जयपुर की स्थापना की गई। 1977 ई. में 5 मार्च, 1977 जयपुर में दूरदर्शन आरम्भ। 1979 ई. में 12 फरवरी, 1979 जयपुर में "राजस्थान उर्दु अकादमी" स्थापित की गई। 1982 ई. में 2 फरवरी, 1982 मोहनलाल सुखाड़िया का बीकानेर में निधन, उदयपुर कृषि विश्वविद्यालय का नाम मोहनलाल. सुखाड़िया विश्वविद्यालय कर दिया। कक्षा - 9 1983 ई. में 25 जनवरी, 1983 राजस्थानी भाषा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी, बीकानेर में स्थापित। वनस्थली विद्यापीठ को वि.वि. के समकक्ष संस्था घोषित की गई। 1986 ई. में 19 जनवरी, 1986 राजस्थान व्रज भाषा अकादमी, भरतपुर में स्थापित की गई। 1987 ई. में 26 जनवरी 1987 राजस्थान के 6 नये संभाग कार्यालय जयपुर, अजमेर, जोधपुर, उदयपुर, कोटा, बीकानेर स्थापित किये गए। 1 जनवरी, 1987 ई. को इंदिरा गांधी नहर का पानी 149 किमी बहते हुए जैसलमेर के मोहनगढ़ गांव पहुंचा। 23 जुलाई, 1987 को अजमेर विश्वविद्यालय की स्थापना हुई। 1994 ई. में 24 अप्रैल, 1994 राजस्थान पंचायती राज कानून लागू किया गया। 24 मई, 1994 ई. राजस्थान में भ्रूण परीक्षण पर रोक लगी। 12 जुलाई, 1994 हनुमानगढ़ राजस्थान का 31वां जिला बना। 13 अक्टूबर, 1994 मेड़ता रोड़ से मेड़ता शहर तक देश की पहली रेल बस सेवा शुरू की गई। 1997 ई. में 10 मई, 1997 राजस्थान सहित 9 राज्यों में फसल बीमा योजना लागू की गई। 20 जुलाई, 1997 ई. करौली प्रदेश का 32वां जिला बना। 1998 ई. में 16 अक्टूबर, 1998 को राजस्थान सरकार द्वारा घोषित पहला खेलरत्न पुरस्कार अन्तर्राष्ट्रीय तीरन्दाज लिम्बाराम को दिया गया। 1999 ई. में 15 मई, 1999 राज्य सरकार ने "राज्य महिला आयोग" का गठन किया गया। 2009 ई. में 28 मई, 2009 राजस्थान में भक्ति आंदोलन के केन्द्र विठ्ठल मंदिर (विष्णु मंदिर) का जिर्णोद्धार हुआ। यह मंदिर और गांव (आबू रोड़, सिरोही) में स्थित है। यह राजस्थान का एक मात्र विठ्ठल मंदिर है।

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