1. कुम्भलगढ़ दुर्ग: इसका निर्माण महाराणा कुम्भा ने 1443-1458 के बीच मण्डन की देखरेख में करवाया। यह मेवाड़-मारवाड़ की सीमा पर है। यहाँ उदयसिंह का राज्याभिषेक और प्रताप का जन्म हुआ था। इसकी दीवार 36 किमी लंबी है, जिस पर 3-4 घुड़सवार एक साथ चल सकते हैं।
2. चित्तौड़गढ़ दुर्ग: इसका वास्तविक नाम चित्रकूट है। 7वीं शताब्दी में चित्रांगद मोरी ने बनवाया। यह 616 फीट ऊँचे पठार पर है और इसमें 7 दरवाजे हैं। यहाँ रानी पद्मिनी महल, विजय स्तम्भ, मीरा मंदिर स्थित हैं।
3. गागरोण दुर्ग: यह एक जलदुर्ग है जो अरावली की पहाड़ी पर कालीसिंध और आहू नदी के संगम पर है। इसका निर्माण डोड राजपूतों ने करवाया था। यह बिना नींव का किला कहलाता है। यहाँ संत पीपा की छतरी भी है।
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