हमारे दिल को भी लगातार ऑक्सीजन और पोषक तत्वों से भरपूर खून की जरूरत होती है। दिल की मांसपेशियों तक यह खून कोरोनरी धमनियों (Coronary Arteries) के जरिए पहुँचता है।
कभी-कभी इन धमनियों की अंदरूनी दीवारों पर कोलेस्ट्रॉल, वसा और अन्य पदार्थ जमा होकर प्लाक (Plaque) बना देते हैं। धीरे-धीरे धमनी का रास्ता संकरा हो सकता है और दिल की मांसपेशियों तक खून कम पहुँचने लगता है। प्लाक फटने पर वहाँ खून का थक्का बनकर धमनी अचानक बंद भी कर सकता है, जिससे हार्ट अटैक हो सकता है।
🔴 स्टेंट (छल्ला) क्या होता है?
स्टेंट एक बहुत छोटी जालीदार धातु की ट्यूब होती है। इसे संकरी या बंद कोरोनरी धमनी के अंदर फैलाकर लगाया जाता है, ताकि धमनी खुली रहे और दिल तक खून का प्रवाह बेहतर हो सके।
आजकल अक्सर Drug-Eluting Stent (DES) लगाए जाते हैं। इन पर विशेष दवा की परत होती है, जो स्टेंट के अंदर दोबारा ज्यादा ऊतक बढ़ने और रास्ता संकरा होने की संभावना कम करती है।
🩺 स्टेंट कैसे डाला जाता है?
इस प्रक्रिया को आमतौर पर कोरोनरी एंजियोप्लास्टी या PCI (Percutaneous Coronary Intervention) कहा जाता है।
1. डॉक्टर आमतौर पर कलाई या जांघ की धमनी से एक पतली कैथेटर ट्यूब अंदर डालते हैं।
2. एक्स-रे और कॉन्ट्रास्ट डाई की मदद से कैथेटर को दिल की प्रभावित कोरोनरी धमनी तक पहुँचाया जाता है।
3. एक पतले गाइड वायर के सहारे मुड़ा हुआ स्टेंट लगा छोटा बैलून ब्लॉकेज वाली जगह तक पहुँचाया जाता है।
4. बैलून फुलाने पर स्टेंट फैलकर धमनी की दीवार से टिक जाता है और रास्ता चौड़ा हो जाता है।
5. बैलून और कैथेटर निकाल लिए जाते हैं, लेकिन स्टेंट वहीं स्थायी रूप से रह जाता है।
6. इससे उस हिस्से में खून का रास्ता खुला रखने में मदद मिलती है।
❓ क्या स्टेंट लगाने के लिए छाती काटनी पड़ती है?
आमतौर पर नहीं। एंजियोप्लास्टी में ओपन-हार्ट सर्जरी की तरह छाती खोलने की जरूरत नहीं होती। कैथेटर कलाई या जांघ की रक्त वाहिका के रास्ते पहुँचाया जाता है।
हालाँकि, हर ब्लॉकेज का इलाज स्टेंट से नहीं किया जाता। कुछ लोगों में दवाएँ, कुछ में एंजियोप्लास्टी और स्टेंट, जबकि कुछ स्थितियों में बायपास सर्जरी (CABG) बेहतर विकल्प हो सकती है। फैसला ब्लॉकेज की जगह, संख्या, गंभीरता और मरीज की पूरी स्थिति देखकर कार्डियोलॉजिस्ट करते हैं।
💊 स्टेंट लगने के बाद दवाएँ क्यों जरूरी होती हैं?
स्टेंट लगने के बाद डॉक्टर अक्सर एंटीप्लेटलेट दवाएँ देते हैं, ताकि स्टेंट के अंदर खून का खतरनाक थक्का बनने का जोखिम कम हो। इनमें एस्पिरिन और किसी दूसरी एंटीप्लेटलेट दवा का उपयोग किया जा सकता है।
इन दवाओं को अपनी मर्जी से बंद नहीं करना चाहिए, क्योंकि ऐसा करने से स्टेंट में थक्का बनने और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ सकता है। दवा कितने समय तक लेनी है, यह डॉक्टर तय करते हैं।
❤️ एक लाइन में समझें
स्टेंट दिल के अंदर नहीं लगाया जाता, बल्कि दिल को खून पहुँचाने वाली संकरी/बंद कोरोनरी धमनी के अंदर लगाया जाता है। इसका काम उस धमनी को खुला रखने में मदद करना है, ताकि दिल की मांसपेशियों तक खून ठीक से पहुँच सके।
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